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बहुआयामी संगीतमयी प्रस्तुति एवं कला जगत की दिग्गज हस्तियों के सम्मान से भास्कर राव संगीत सम्मेलन का भव्य आगाज

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित 51वें भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन का आगाज आज यहां टैगोर थियेटर में हुआ । केन्द्र पिछले सात दशकों से भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार में निरंतर कार्यरत है । कोरोना की इस मुश्किल समय में भी केन्द्र ने जोखिमों भरे हालात में संगीतमयी कार्यक्रमों का आयोजन करने की हिम्मत दिखाई । टैगोर थियेटर में आयोजित किए जा रहे इस सम्मेलन में देशभर के नामी कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेंगे । हर रोज़ सायं 6:30 बजे इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा । इसके अलावा केन्द्र के अधीकृत यूटयूब एवं  फेसबुक पेज पर भी इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा । इस अवसर पर केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर , रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर एवं  निदेशक प्रोजेक्ट प्लानिंग एवं डेवलपमेंट विभाग श्री आशुतोष महाजन उपस्थित थे।

आज इस कार्यक्रम के पहले दिन पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक, चंडीगढ़ प्रशासन  श्री  बनवारी लाल पुरोहित जी  ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और इस महा सम्मलेन का  उद्घाटन किया।    इसके पश्चात माननीय राज्यपाल ने   पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन रसम अदा  की।  और कला जगत की कुछ प्रसिद्ध हस्तियों को सम्मानित भी किया । इनमें  तालयोगी पंडित सुरेश  तलवलकर, श्री सिद्धार्थ एवं श्रीमती अंजना राजन   को सम्मानित किया गया ।

इसके  उपरांत माननीय मुख्य अतिथि ने केंद्र के कला एवं संगीत के प्रति अद्वितीय  प्रयासों की सराहना की  और कला के प्रचार  प्रसार और संरक्षण   के लिए  निस्वार्थ सेवा की भरपूर सराहना की।   प्रशंसा करते हुए कहा की संगीत वह विधा है जो आज के परिवेश में युवा वर्ग के लिए बहुत महत्वपूर्ण  है।

इस सम्मान समारोह के बाद तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर ने मंच संभाला ।  इस बहुआयामी संगीत प्रस्तुति में सुरेश जी ने झप ताल में निबद्ध बंदिश पूजा से पवन हो मन शुरूआत की जिसमें पारम्परिक कायदे रेले पलटे इत्यादि पेश किये गए  । उपरांत आढ़ा चौताल में निबद्ध  बंदिश “हटो पिया अब  अब निकन हो”   पेश की गई । तबले की  बोल  के साथ इन बंदिशों  की जुगलबंदी का  जादू दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर गया।  कार्यक्रम के अंत में  तीन ताल में निबद्ध तबले  की पारम्परिक बंदिशों के साथ साथ दो पश्चिमी तंत्रवादों के साथ  एक खूबसूरत  प्रस्तुति पेश की गई  जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।   बहुत सी पारम्परिक बंदिशें खूबसूरत धुनों से सजी इस शाम को दर्शक सदैव याद रखेंगे । इनके साथ मंच पर सुश्री सावनी तलवलकर तबले पर  , नागनाथ अडग़ाओंकर गायन पर  , अभिषेक शिंकर हारमोनियम पर  , ईशान परांजपे ने पडंत पर  और ऋतुराज हीगे ने कलाबाश पर बखूबी संगत की   ।

कार्यक्रम के अंत में पंडित सुरेश जी के सह कलाकारों को  मौमेंटो एवं उतरीया भेंट किया गया । कल  यानि 22  दिसंबर को  डॉ प्रो हरविंदर सिंह  शास्त्रीय गायन और पंडित देबाशीष भट्टाचार्य  सरोद वादन से संगीत प्रेमियों का मनोरंजन करेंगे।  इस कार्यक्रम का मंच सञ्चालन डॉ समीरा कौसर ने किया।

 

 

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