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एक जमाने में भारत की शान था तक्षशिला विश्वविद्यालय : डॉ वरिंदर गर्ग

    • -सप्तसिंधु सभ्यता ने विश्व भर का किया मार्गदर्शन , सबसे प्राचीन व सुद्रढ़ सभ्यता का जनक है हमारा पंजाब – वरिंदर

    चंडीगढ़

    एक जमाने में तक्षशिला विश्वविद्यालय भारत की बड़ी पहचान और शिक्षा के क्षेत्र में गर्व का प्रतीक था. तक्षशिला विश्वविद्यालय को दुनिया का सबसे पहला विश्वविद्यालय माना जाता है. ये तक्षशिला शहर में था, जो प्राचीन भारत में गांधार जनपद की राजधानी और एशिया में शिक्षा का प्रमुख केंद्र था व इसमें 64 विभाग व विश्व भर से 10,000 विद्यार्थी यहां पढ़ते थे । वेद भी सप्तसिंधु में रचे गए , ऋग्वेद ने ही हमारी जीवनशैली को उत्कृष्ट बनाया।

    पंजाब यूनिवर्सिटी में निवेदिता ट्रस्ट द्वारा आयोजित सप्तसिंधु वर्कशॉप में ये उदगार डॉ वरिंदर गर्ग ने कहे ,उन्होंने सप्तसिंधु की वृहद व उत्कृष्ट सभ्यता की जानकारी देते हुए बताया कि मोहेंजोदड़ो व हड़प्पा सप्तसिंधु के भव्य व गजब की टेक्नोलॉजी से सुसज्जित थे। विश्व का पहला छंद व महाकाव्य महिर्षि बाल्मीकि ने लिखा , अष्टध्याययी व्याकरण की बेहतरीन पुस्तक है , इसी प्रकार अर्थशास्त्र की प्राचीनतम पुस्तक चाणक्य द्वारा रची गई।

    सप्तसिंधु वर्कशॉप में ऑनलाइन जुड़े निर्मलजीत कलसी पूर्व आई ए एस ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली व सभी विषयों का ज्ञान का समावेश करना होगा , जो व्यवसाय ,परम्पराएं , आदि भारत की विविध संस्कृति व दर्शन जो हमने संग्रहित किया है व जो विधाएं हमने संरक्षित की है उन्हें आज की युवा पीढ़ी व भावी पीढ़ियों की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में समाहित करके ही भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हो सकता है।

    सप्तसिंधु काव्य उत्सव में राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने शमा रोशन की इन साथ सुरजीत पातर, प्रो हर्ष गांधार , डॉ वरिंदर गर्ग मौजूद रहे । काव्य उत्सव में विश्व भर से करीब 10 देश के पंजाबी कवियों ने शमूलियत की

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