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6 अप्रैल भाजपा के 42 वें स्थापना दिवस पर विशेष


  • अंबाला शहर  विधानसभा हलका रहा है जनसंघ-भाजपा का परम्परागत गढ़

    हालांकि 2 बार भाजपा प्रत्याशियों  की जमानत राशि  जब्त  भी हुई  – हेमंत


अम्बाला शहर

6 अप्रैल 2022 को  विश्व के मौजूदा  सबसे बड़े  राजनीतिक दल  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का  42 वां  स्थापना दिवस है.  चार दशक पूर्व वर्ष 1980 में  इसी दिन तत्कालीन  जनता पार्टी के विघटन के बाद उसमें  शामिल  एक घटक जन संघ के  अलग होने से  भाजपा की स्थापना हुई थी एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे. हालांकि भारतीय जन संघ की स्थापना वर्ष 1951 में  श्यामा प्रसाद मुख़र्जी द्वारा की गयी थी.

बहरहाल, शहर के सेक्टर 7 निवासी पंजाब एवं हरियाणा  हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने भाजपा के 42 वें स्थापना दिवस पर  कि  जहाँ तक स्थानीय अंबाला शहर विधानसभा हलके का विषय है, तो  इसमें कोई संदेह नहीं कि शहर हलका परम्परागत तौर पर पहले भारतीय जनसंघ और फिर भाजपा का गढ़ रहा है एवं आज तक यहाँ हुए कुल 13 विधानसभा आम चुनावों में से 8 बार जनसंघ और भाजपा के उम्मीदवार जबकि 5 बार कांग्रेसी प्रत्याशी  विजयी रहे हैं. आज तक शहर  हलके से  पहले जनसंघ और फिर  भाजपा के मास्टर शिव प्रसाद लगातार तीन बार- वर्ष 1977  1982 और 1987 में  कांग्रेस की  लेखवती जैन लगातार दो बार वर्ष 1968 और 1972 में , कांग्रेस के टिकेट पर विनोद शर्मा लगातार दो बार वर्ष 2005 और 2009 में, भाजपा से असीम गोयल लगातार दो बार वर्ष 2014 और 2019 में, भाजपा से एडवोकेट फकीर चंद अग्रवाल वर्ष  1967 में , भाजपा से  हेडमास्टर फ़क़ीर चंद वर्ष 1996 में  और भाजपा से  ही वीना छिब्बर एक  बार वर्ष 2000  में और कांग्रेस से सुमेर चंद भट्ट एक बार वर्ष 1991 में  विधायक  बने हैं.

हालांकि  हेमंत ने बताया की करीब सवा वर्ष पूर्व  दिसम्बर, 2020 में स्थानीय  अम्बाला नगर निगम के  मेयर पद  के चुनाव में, जो एक प्रकार से शहर के विधायक चुनने जैसा ही  चुनाव था क्योंकि उसमें शहर हलके के नगर निगम क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा वोट डालकर सीधे मेयर का प्रत्यक्ष( सीधा) निर्वाचन  किया गया, में   हरियाणा जनचेतना पार्टी (हजपा ) (वी ) की उम्मीदवार और पार्टी सुप्रीमो  विनोद शर्मा की धर्मपत्नी  शक्ति रानी शर्मा  ने प्रदेश  में     सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी की प्रत्याशी डॉ. वंदना शर्मा को 8084 वोटों के विशाल अंतर से  पराजित किया.    हालांकि डा. वंदना ने हारकर भी  अंबाला नगर निगम मेयर चुनाव में  भाजपा की जमानत राशि जब्त नहीं होने दी.  अक्तूबर, 2009  हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में उनके पति संजय शर्मा, जो भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं,  ने  अंबाला शहर विधानसभा हलके से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हुए 10 % से भी कम वोट हासिल किए थे जिससे उनकी जमानत राशि जब्त हो गई थी.

इसी प्रकार फरवरी, 2005 विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी दिवंगत वीना छिब्बर ने भी अम्बाला शहर विधानसभा हलके से केवल 12 % वोट हासिल किए जिससे उनकी भी जमानत जब्त हो गई थी.  रोचक बात यह है कि उपरोक्त दोनों  बार  चुनावों में अर्थात जब जब शहर हलके से भाजपा प्रत्याशी की ज़मानत जब्त हुई, तब  कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे विनोद शर्मा ही विजयी रहे थे. वीना की पुत्रवधु अर्चना छिब्बर वर्तमान में नगर निगम की वार्ड 6 से भाजपा की नगर निगम सदस्य (पार्षद ) हैं.

हेमंत  ने बताया कि अक्टूबर, 2019  में मौजूदा  14 वीं  हरियाणा विधानसभा के   आम चुनावो में अम्बाला शहर विधानसभा  हलके से   भाजपा से निर्वाचित एवं मोजूदा विधायक  असीम गोयल नन्यौला ने   42.2 % वोट   हासिल  कर लगातार दूसरी बार निर्वाचित हुए थे एवं उन्होंने    निर्दलयी उम्मीदवार निर्मल सिंह मोहड़ा को करीब 9 हज़ार  वोटो के अंतर से हराया था.

हेमंत  ने  भारतीय  चुनाव  आयोग  के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर  बताया कि  हालांकि इससे पूर्व   मई, 2019 में  17 वीं लोकसभा आम  चुनावो में अम्बाला (आरक्षित) लोक सभा सीट के अंतर्गत पड़ने वाले कुल 9  विधानसभा विधानसभा हलकों में से एक अम्बाला शहर क्षेत्र में  भाजपा उम्मीदवार रतन लाल कटारिया को तब कुल पड़े 1  लाख 57 हज़ार 898 वोटों में से 90 हज़ार 316 वोट प्राप्त हुए थे. इस  प्रकार मात्र पांच माह में ही अर्थात मई, 2019 और अक्टूबर, 2019 के मध्य अम्बाला शहर में भाजपा के 25 हज़ार 420 वोट कम हो गए थे.

दिसंबर, 2020 में अंबाला  नगर निगम चुनावों में भाजपा ने कुल पड़े वोटों में से एक-तिहाई से भी कम वोट हासिल किए. भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी होनी चाहिए. हालांकि लोक सभा सांसद और  विधायक चुनाव और स्थानीय नगर निगम मेयर में मुद्दे अलग अलग होते हैं ( निगम क्षेत्र शहर विधानसभा हलके से छोटा भी है क्योंकि इसमें 100 के करीब गाँव शामिल नहीं हैं) परन्तु ऐसा माना जाना है कि भाजपा के कट्टर/परम्परागत मतदाता  हर चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को ही वोट डालते हैं.  

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